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शुक्रवार, 18 मार्च 2011



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रविवार, 6 फ़रवरी 2011

जो उड़ती ही नहीं

कहते हैं की लड़कियाँ चिड़िया के समान होती हैं
वो एक जगह नहीं टिकती
फुर्र हो जाती हैं
मगर मैंने तो कई लडकियों को देखा है
जो उड़ती ही नहीं
जड़वत हो गयीं हैं
अपने बूड़े माँ-बाप की खातिर
नन्हें भाईओं के लिए
तो मैं कैसे मान लूँ ?
कि लडकियाँ चिड़िया के समान होती हैं
वो एक जगह नहीं टिकती
फुर्र हो जाती हैं.

उदास होंगे महीने साल हो जाएँगे वीरान

उदास होंगे महीने
साल हो जाएँगे वीरान
फट पड़ेगी धरती
बादल टूट के बरसेगा
प्रेम फिर भी प्रेम रहेगा
गर्दिश में रहे ग़रीबी
तंगहाल मानवता
रो पड़ेगी ममता
थर्राएगी ये हवा
प्रेम फिर भी प्रेम रहेगा
चाहे जो भी हो
बदलाव नियम भी हो
प्रेममाँ और उम्मीद
हर दम यहाँ मौज़ूद रहेंगे
चाहे मौत सबको हर ले
फिर भी ये रहेंगे।
[२-१०-2010]
-manohar chamoli 'manu'

मंगलवार, 25 जनवरी 2011

मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।

ऐ अमरों की जननी, तुमको शत-शत बार प्रणाम,
तेरे उर में शायित गांधी, 'बुद्ध औ' राम,
मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।
1
हिमगिरि-सा उन्नत तव मस्तक,
तेरे चरण चूमता सागर,
श्वासों में हैं वेद-ऋचाएँ
वाणी में है गीता का स्वर।
1
ऐ संसृति की आदि तपस्विनि, तेजस्विनि अभिराम।
मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।
1
हरे-भरे हैं खेत सुहाने,
फल-फूलों से युत वन-उपवन,
तेरे अंदर भरा हुआ है
खनिजों का कितना व्यापक धन।
1
मुक्त-हस्त तू बाँट रही है सुख-संपत्ति, धन-धाम।
मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।
1
प्रेम-दया का इष्ट लिए तू,
सत्य-अहिंसा तेरा संयम,
नयी चेतना, नयी स्फूर्ति-युत
तुझमें चिर विकास का है क्रम।
1
चिर नवीन तू, ज़रा-मरण से - मुक्त, सबल उद्दाम।
मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।
1
एक हाथ में न्याय-पताका,
ज्ञान-द्वीप दूसरे हाथ में,
जग का रूप बदल दे हे माँ,
कोटि-कोटि हम आज साथ में।
1
गूँज उठे जय-हिंद नाद से सकल नगर औ' ग्राम।
मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।
प्रस्तुतकर्ता YASHPAL SINGH

सोमवार, 15 नवंबर 2010

समझते हैँ वो के पत्थर है हम

समझते है वो के
पत्थर है हम।

उनको ठोकर मार जायेगे हम।

वो एक बार कह दे नफरत है हम से,

खुदा कसम पत्थर तो क्या फूल बनकर,

भी राह में नहीं आयेगे हम।

ज़िन्दगी में बहुत बार वक़्त
ऐसा आयेगा जब

तुमको चाहने वाला ही तुमको रुलाएगा

पर विश्वाश रखना उस पर
अकेले में वो तुमसे कही
ज्यादा आंसू

बहाएगा ...

ना पूछ के मेरे सबर की इन्तहा कहा तक
है।

तू सितम करके देख तेरी ताकत जहा तक है

वफ़ा की उम्मीद उन्हें होगी पर

मुझे देखना है के तू बेवफा कहा तक
है ..

कुछ लोग सितम करने को तैयार बैठे है।

कुछ लोग हम पैर दिल हार बैठे है।

इश्क को आग का दरिया ही समझ लीजिये।

कुछ इस पर कुछ उस पर बैठे है ..

वो हम को पत्थर और खुद को फूल कह कर
मुस्कुराया करते है।

उन्हें क्या पता पत्थर तो पत्थर
ही रहते है फूल ही मुरझाया करते है ..

कुछ खोने का गम ही डर की वजह बनता है।

इसलिए आओ तमाम
गमो को अपनी खुशियों मे बदले
और साबित कर दे की
डर के आगे जीत है ..

बिता लेंगे तेरे इंतजार मे ज़िन्दगी

तू एक बार आने का वादा तो कर

हम बना लेंगे अपने हाथो से कबर अपनी

तू चिराग जलाने
का वादा तो कर नवम्बर 2

गुरुवार, 11 नवंबर 2010

अब लिखने को क्या बाकि है

अब क्या लिखें हम कागज़ पर, अब लिखने
को क्या बाकी है !!
इक दिल था सो वो टूट गया, अब टूटने
को क्या बाकी है !!
इक शक्स को हम ने चाहा था, इक रेत पे
नक्शा बनाया था !!
वो रेत तो हवा बिखरे चुकी, वो नक्शा
कहाँ अब बाकी है !!
जो सपने हमने देखे थे काग़ज़ पर सारे
लिख डाले हैँ !!
वो सारे काग़ज़ फिर हम ने दरिया के
हवाले कर डाले है !!
वो सारे ख्वाब बहा डाले, वो सारे नक्श
मिटा डाले !!
अब ज़हां है खाली नक्शों का, कोई
ख्वाब कहाँ अब बाकी है !!
हम जिनको अपनी नज़मो का, लफ्ज
बनाया करते थे !!
लफ्जों का बना कर ताजमहल, काग़ज़ पर
सजाया करते थे !!
वो हम को अकेला छोड़ गए, सब
रिश्तों से मुंह मोड़ गए !!
अब रास्ते सारे सूने हैं, वो प्यार
कहाँ अब बाकी है !!
अब क्या लिखें हम कागज़ पर, अब लिखने
को क्या बाकी

सोमवार, 8 नवंबर 2010

दिपावली के पलो को इस तरह बिताया हमनेँ।

दिपावली के पल इस तरह बिताया हमने।

दिपावली पर तुम से मिलने का मन बनाया हमने।

दीप जलाकर छत पर सजाने के बहाने।

तुम से अकेले मेँ मिलना चाहा हमने।

दिपावली के पलो को इस तरह बिताया हमने।।

पर नही हो सकी तुम से मुलाकात अधूरी थी सब बात

इस बार भी किस्मत से धोखा खाया हमने।

दिपावली के पलो को इस तरह बिताया हमने।

दुबारा मिलने की कौशिश बिजली के जलते बल्बो को ठीक करने के बहाने से की थी।

पर नजरे तुम्हे ढुढने मेँ लगी थी और हाथ छु गया नँगे तार ।

इस बार बिजली का तगडा झटका खाया हमने।

दिपावली के पलो को इस तरह बिताया हमने।।

एस एम एस पैक काम नही करते त्यौहारो पर।

विस करना था तुमको जरुरी

इसलिए एस एम एस के भी पूरा चार्ज कटाया हमने।

दिपावली के पल इस तरह बिताये हमने