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मंगलवार, 25 जनवरी 2011

मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।

ऐ अमरों की जननी, तुमको शत-शत बार प्रणाम,
तेरे उर में शायित गांधी, 'बुद्ध औ' राम,
मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।
1
हिमगिरि-सा उन्नत तव मस्तक,
तेरे चरण चूमता सागर,
श्वासों में हैं वेद-ऋचाएँ
वाणी में है गीता का स्वर।
1
ऐ संसृति की आदि तपस्विनि, तेजस्विनि अभिराम।
मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।
1
हरे-भरे हैं खेत सुहाने,
फल-फूलों से युत वन-उपवन,
तेरे अंदर भरा हुआ है
खनिजों का कितना व्यापक धन।
1
मुक्त-हस्त तू बाँट रही है सुख-संपत्ति, धन-धाम।
मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।
1
प्रेम-दया का इष्ट लिए तू,
सत्य-अहिंसा तेरा संयम,
नयी चेतना, नयी स्फूर्ति-युत
तुझमें चिर विकास का है क्रम।
1
चिर नवीन तू, ज़रा-मरण से - मुक्त, सबल उद्दाम।
मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।
1
एक हाथ में न्याय-पताका,
ज्ञान-द्वीप दूसरे हाथ में,
जग का रूप बदल दे हे माँ,
कोटि-कोटि हम आज साथ में।
1
गूँज उठे जय-हिंद नाद से सकल नगर औ' ग्राम।
मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।
प्रस्तुतकर्ता YASHPAL SINGH

सोमवार, 15 नवंबर 2010

समझते हैँ वो के पत्थर है हम

समझते है वो के
पत्थर है हम।

उनको ठोकर मार जायेगे हम।

वो एक बार कह दे नफरत है हम से,

खुदा कसम पत्थर तो क्या फूल बनकर,

भी राह में नहीं आयेगे हम।

ज़िन्दगी में बहुत बार वक़्त
ऐसा आयेगा जब

तुमको चाहने वाला ही तुमको रुलाएगा

पर विश्वाश रखना उस पर
अकेले में वो तुमसे कही
ज्यादा आंसू

बहाएगा ...

ना पूछ के मेरे सबर की इन्तहा कहा तक
है।

तू सितम करके देख तेरी ताकत जहा तक है

वफ़ा की उम्मीद उन्हें होगी पर

मुझे देखना है के तू बेवफा कहा तक
है ..

कुछ लोग सितम करने को तैयार बैठे है।

कुछ लोग हम पैर दिल हार बैठे है।

इश्क को आग का दरिया ही समझ लीजिये।

कुछ इस पर कुछ उस पर बैठे है ..

वो हम को पत्थर और खुद को फूल कह कर
मुस्कुराया करते है।

उन्हें क्या पता पत्थर तो पत्थर
ही रहते है फूल ही मुरझाया करते है ..

कुछ खोने का गम ही डर की वजह बनता है।

इसलिए आओ तमाम
गमो को अपनी खुशियों मे बदले
और साबित कर दे की
डर के आगे जीत है ..

बिता लेंगे तेरे इंतजार मे ज़िन्दगी

तू एक बार आने का वादा तो कर

हम बना लेंगे अपने हाथो से कबर अपनी

तू चिराग जलाने
का वादा तो कर नवम्बर 2

गुरुवार, 11 नवंबर 2010

अब लिखने को क्या बाकि है

अब क्या लिखें हम कागज़ पर, अब लिखने
को क्या बाकी है !!
इक दिल था सो वो टूट गया, अब टूटने
को क्या बाकी है !!
इक शक्स को हम ने चाहा था, इक रेत पे
नक्शा बनाया था !!
वो रेत तो हवा बिखरे चुकी, वो नक्शा
कहाँ अब बाकी है !!
जो सपने हमने देखे थे काग़ज़ पर सारे
लिख डाले हैँ !!
वो सारे काग़ज़ फिर हम ने दरिया के
हवाले कर डाले है !!
वो सारे ख्वाब बहा डाले, वो सारे नक्श
मिटा डाले !!
अब ज़हां है खाली नक्शों का, कोई
ख्वाब कहाँ अब बाकी है !!
हम जिनको अपनी नज़मो का, लफ्ज
बनाया करते थे !!
लफ्जों का बना कर ताजमहल, काग़ज़ पर
सजाया करते थे !!
वो हम को अकेला छोड़ गए, सब
रिश्तों से मुंह मोड़ गए !!
अब रास्ते सारे सूने हैं, वो प्यार
कहाँ अब बाकी है !!
अब क्या लिखें हम कागज़ पर, अब लिखने
को क्या बाकी

सोमवार, 8 नवंबर 2010

दिपावली के पलो को इस तरह बिताया हमनेँ।

दिपावली के पल इस तरह बिताया हमने।

दिपावली पर तुम से मिलने का मन बनाया हमने।

दीप जलाकर छत पर सजाने के बहाने।

तुम से अकेले मेँ मिलना चाहा हमने।

दिपावली के पलो को इस तरह बिताया हमने।।

पर नही हो सकी तुम से मुलाकात अधूरी थी सब बात

इस बार भी किस्मत से धोखा खाया हमने।

दिपावली के पलो को इस तरह बिताया हमने।

दुबारा मिलने की कौशिश बिजली के जलते बल्बो को ठीक करने के बहाने से की थी।

पर नजरे तुम्हे ढुढने मेँ लगी थी और हाथ छु गया नँगे तार ।

इस बार बिजली का तगडा झटका खाया हमने।

दिपावली के पलो को इस तरह बिताया हमने।।

एस एम एस पैक काम नही करते त्यौहारो पर।

विस करना था तुमको जरुरी

इसलिए एस एम एस के भी पूरा चार्ज कटाया हमने।

दिपावली के पल इस तरह बिताये हमने

शनिवार, 30 अक्टूबर 2010

करवा चौथ के व्रत का मनोवैज्ञानिक प्रभाव

प्रिय्
पाठको ,
जैसा कि आप सभी को मालूम
हैँ ,कि करवा चौथ के व्रत के साथ
ही भारतीय त्यौहारो का मौसम शुरु हो,
चुका है। परमपरा व धार्मिक
मान्यता के अनुसार करवा चौथ का व्रत
विवाहित महिलाए अपने
पति कि लम्बी आयु के लिए रखती हैँ
स्त्रिया इस कठोर व्रत
तथा पूजा को अपना पति धर्म
समझती हैँ। लेकिन इस व्रत के पीछे कई
मनोवैज्ञानिक तथ्य व प्रभा व भी है।
जैसा कि जब पत्नि व्रत रखती है
तो पति को अपनी पत्नि के यह कठोर व्रत
( जिसमेँ पानी भी नहीँ पिया जाता)
रखने के कारण यह मानसिक आभास होता है
कि उसकी पत्नि कोई भी विपत्ति आने पर
उसकी ढाल बनकर रक्षा करेगी तथा बुरे
वक्त मेँ उसका साथ देगी। यह सब सोचने
के कारण पति के मन मेँ अपनी पत्नि के
प्रति सच्चा प्रेम व विश्वास जाग्रत
होता है। साथ ही पति का सच्चा प्यार
पाकर पत्नि का व्यहार कोमल
हो जाता है। वह पति तथा सास -ससुर
को आदर देती है। पूजा तथा व्रत
मनुष्य के आत्मविश्वाश
को बढा देता है। आत्मविश्वाश बढने से
कार्य क्षमता मेँ वृध्दि होती है।
प्यार और स्नेह बढने से परिवार मेँ
खुशहाली आती जिससे खुशहाल देश के
निमार्ण मेँ सहयोग मिलता हैँ। तो ऐसे
सिध्द होता हैँ ।इस कठोर व्रत
का वैज्ञानिक तथा मनोवैज्ञानिक तथ्य
व प्रभाव। .........YASHPAL SINGH
ADVOCATE FROM - RAMPUR
MANIHARAN(SAHARANPUR) U.P.
Email:
yashpalsingh5555@gmail.com
मो 0 न0 9758087475

शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2010

करवा चौथ के व्रत का मनोवैज्ञानिक प्रभाव

प्रिय्
पाठको,
जैसा कि आप सभी को मालूम हैँ,कि करवा चौथ के व्रत के साथ ही भारतीय त्यौहारो का मौसम शुरु हो, चुका है। परमपरा व धार्मिक मान्यता के अनुसार करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलाए अपने पति कि लम्बी आयु के लिए रखती हैँ स्त्रिया इस कठोर व्रत तथा पूजा को अपना पति धर्म समझती हैँ। लेकिन इस व्रत के पीछे कई मनोवैज्ञानिक तथ्य व प्रभा व भी है। जैसा कि जब पत्नि व्रत रखती है तो पति को अपनी पत्नि के यह कठोर व्रत(जिसमेँ पानी भी नहीँ पिया जाता) रखने के कारण यह मानसिक आभास होता है कि उसकी पत्नि कोई भी विपत्ति आने पर उसकी ढाल बनकर रक्षा करेगी तथा बुरे वक्त मेँ उसका साथ देगी। यह सब सोचने के कारण पति के मन मेँ अपनी पत्नि के प्रति सच्चा प्रेम व विश्वास जाग्रत होता है। साथ ही पति का सच्चा प्यार पाकर पत्नि का व्यहार कोमल हो जाता है। वह पति तथा सास-ससुर को आदर देती है। पूजा तथा व्रत मनुष्य के आत्मविश्वाश को बढा देता है। आत्मविश्वाश बढने से कार्य क्षमता मेँ वृध्दि होती है। प्यार और स्नेह बढने से परिवार मेँ खुशहाली आती जिससे खुशहाल देश के निमार्ण मेँ सहयोग मिलता हैँ। तो ऐसे सिध्द होता हैँ ।इस कठोर व्रत का वैज्ञानिक तथा मनोवैज्ञानिक तथ्य व प्रभाव।.........YASHPAL SINGH ADVOCATE FROM - RAMPUR MANIHARAN(SAHARANPUR) U.P. Email: yashpalsingh5555@gmail.com मो0 न0 9758087475

मंगलवार, 26 अक्टूबर 2010

U.P. मेँ हो हुए जिला पँचायत सदस्य, बी0डी0सी0 व ग्राम प्रधान पद के लिए आपके द्वारा चुना गया प्रत्याशी कैसा होना चाहिए था

ईमानदार व शिक्षित हो।
और हो वह सदाचारी ।
पद की निभा सके जो जिम्मेदारी।
पुरुष हो चाहे हो नारी ।।
वह हो अल्पाहारी अर्थात
वह कम हो भ्रष्टाचारी ।
जनता का वह सेवक हो ।
दुखियो का वह हो हितैषी।
जाग्रत हो , विकास पुरुष हो
सबका मान रखने वाला हो
बुर्जुगो की करता हो सेवा ।
जो विकास कार्यो के रुपयो को
ना समझे अपने बाप का।
और अधिकारियो से काम ,
निकलवा सके आपका ।
बस ऐसे ही प्रत्याशी को।
आप अपना कीमती मत देना ।
और इस चुनाव मेँ उसका ,
विजय प्रचम लहरा देना ।
................YASHPAL SINGH ADVOCATE
RAMPUR MANIHARAN (DUGCHARA)
SAHARANPUR
U.P. INDIA
Email:
yashpaladvocate5555@gmail.com